
Satyakhabar, Haryana
Mild Earthquake : प्रदेश के सोनीपत जिले में मकर संक्रांति को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 रही और इसका केंद्र सोनीपत में 5 किलोमीटर की गहराई पर था। यह झटके मुख्य रूप से गोहाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में महसूस हुए। अचानक आए कंपन से कई लोग घबराकर अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। हालांकि, इस हल्की तीव्रता के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान या बड़ी क्षति की कोई रिपोर्ट नहीं है। हरियाणा में पिछले कुछ महीनों में ऐसे हल्के भूकंप कई बार आए हैं। यह क्षेत्र सिस्मिक जोन-4 में आता है, जहां मध्यम तीव्रता के भूकंप का खतरा रहता है, लेकिन आज का झटका सामान्य और गैर-खतरनाक श्रेणी का था।

प्रदेश के सोनीपत व झज्जर जिले दिल्ली फाल्ट लाइनों के निकट होने के कारण इन जिलों पर भी भूकंपीय गतिविधियों का प्रभाव पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा के विभिन्न जिलों खासकर रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, यमुनानगर और झज्जर में समय-समय पर महसूस किए गए भूकंपीय झटकों ने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस श्रेणी में आने वाले क्षेत्रों में 5 से 6.5 तीव्रता तक के भूकंप आने की संभावना बनी रहती है। हरियाणा भले ही उच्च भूकंपीय जोन में न हो, लेकिन बदलते भूगर्भीय हालात और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के चलते भूकंप का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
ये सभी जिले में जोन फैक्टर 0.16 में आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये झटके बड़े भूकंप की चेतावनी नहीं कहे जा सकते, लेकिन यह जरूर दर्शाते हैं कि धरती के भीतर हलचल लगातार बनी हुई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जेएल गौतम बताते हैं कि आपदा प्रबंधन को लेकर योजनाएं तो काफी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां बनी हैं। लगातार भूकंप आने का मुख्य कारण धरती की टेक्टोनिक प्लेटों में बना तनाव है। धरती की ऊपरी सतह कई प्लेटों से बनी है, जो निरंतर खिसकती रहती हैं। इनके टकराने, फिसलने या अलग होने से जमा तनाव जब अचानक निकलता है तो भूकंप आता है। तनाव पूरी तरह खत्म न होने पर एक के बाद एक छोटे झटके महसूस होते हैं।
फॉल्ट लाइनों पर हलचल, बड़े भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशाक्स, हिमालय क्षेत्र की सक्रियता और कम गहराई पर आने वाले भूकंप भी इसके कारण हैं। कई बार धरती संतुलन बनाने के लिए छोटे झटकों से तनाव निकालती है, जिसे वैज्ञानिक स्ट्रेस एडजस्टमेंट प्रोसेस कहते हैं।
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